परव वजञनक कल (परतन समय स 1800 तक) म असमनय मनवजञन क यतर
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पूर्व वैज्ञानिक काल (पुरातन समय से 1800 तक ) में असामान्य मनोविज्ञान की यात्रा (विकास) मुख्यतः धार्मिक, सांस्कृतिक, दार्शनिक तथा प्रारंभिक चिकित्सकीय मान्यताओं के प्रभाव में हुआ। प्राचीन काल में मानसिक विकारों को प्रायः दुष्ट आत्माओं, देवी-देवताओं के क्रोध, जादू-टोना अथवा अलौकिक शक्तियों का परिणाम माणा जाता था। उपचार के रूप में झाड़-फूँक, मंत्रोच्चार, धार्मिक अनुष्ठान तथा विभिन्न पारंपरिक विधियों का प्रयोग किया जाता था। बाद में युनानी चिकित्सक हिप्पोक्रेट्स ने मानसिक विकारों की प्राकृतिक एवं जैविक व्याख्या प्रस्तुत करते हुए उन्हें शरीर के चार द्रवों के अंसंतुलन से जोड़ा जिससे वैज्ञानिक दृष्टिकोण की प्रारंभिक नींव पड़ी। मध्यकाल में पुनः धार्मिक अंधविश्वासों का प्रभाव बढ़ा और मानसिक रोगियों के साथ अमानवीय व्यवहार किया गया। पुनर्जागरण एवं प्रवोधन काल में मानवतावादी दृष्टिकोण विकिसित हुआा, जिसके परिणामस्वरूप मानसिक रोगियों के प्रति सहानुभूति पूर्ण व्यवहार और संस्थागत देखभाल की अवधारणा उभरी। इस अबधि की विचारधाराओं और उपचार पद्धतियों ने आधुनिक असामान्य मनोविज्ञान तथा वैज्ञानिक मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के विकास की आधारशिला स्थापित की।
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