गरमण और नगरय वकस म समजशसतरय अधययन
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प्रस्तावना- मानव समाज निरंतर परिवर्तनशील है। समय के साथ समाज की आर्थिक, राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक संरचनाओं में परिवर्तन होता रहता है। विकास इसी परिवर्तन की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। विकास का उद्देश्य केवल आर्थिक समृद्धि प्राप्त करना नहीं है, बल्कि समाज के सभी वर्गों के जीवन स्तर में सुधार करना, सामाजिक असमानताओं को कम करना तथा लोगों को बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और जीवन की मूलभूत सुविधाएँ उपलब्ध कराना भी है।भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में विकास को मुख्य रूप से ग्रामीण और नगरीय दोनों क्षेत्रों के संदर्भ में समझना आवश्यक है। भारत की बड़ी आबादी लंबे समय तक ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करती रही है, जहाँ कृषि, पशुपालन और छोटे व्यवसाय आजीविका के प्रमुख साधन रहे हैं। दूसरी ओर, औद्योगीकरण, व्यापार, शिक्षा और रोजगार के विस्तार के कारण नगरों का तेजी से विकास हुआ है।समाजशास्त्र विकास की प्रक्रिया को केवल आर्थिक आँकड़ों के आधार पर नहीं देखता, बल्कि यह अध्ययन करता है कि विकास से सामाजिक संबंधों, परिवार, जाति, वर्ग, लिंग, संस्कृति, शिक्षा, रोजगार और जीवन-शैली में किस प्रकार परिवर्तन आता है। इसी कारण ग्रामीण और नगरीय विकास का समाजशास्त्रीय अध्ययन अत्यंत महत्वपूर्ण है।
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