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2026 article

परपर स परवरतन तक लददख क समजक-ससकतक, आरथक तथ रजनतक सरचन क समकलन अधधयन

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लद्दाख, जो हिमालय की ऊँची और दुर्गम पर्वत श्रृंखलाओं के बीच बसा है, भारत के सबसे विशिष्ट भौगोलिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में से एक है। पारंपरिक रूप से यह क्षेत्र बौद्ध और मुस्लिम समुदायों के शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का प्रतीक रहा है जहाँ लगभग 66ण्40ः जनसंख्या बौद्ध और लगभग 14ः मुस्लिम है। लद्दाख की सामाजिक संरचना स्थानीय सामुदायिक संस्थाओं, मठों, और पारंपरिक ग्राम परिषदों पर आधारित है जिन्होंने सदियों से सामाजिक जीवन का संचालन किया है। 5 अगस्त 2019 भारत के संवैधानिक इतिहास में एक निर्णायक तिथि रही, जब अनुच्छेद 370 और 35। के निरस्तीकरण के साथ जम्मू-कश्मीर को दो केन्द्रशासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में विभाजित कर दिया गया। इससे लद्दाख को एक अलग प्रशासनिक पहचान मिली, परंतु राज्य की शक्तियों और विधायी अधिकारों की सीमितता ने नई राजनीतिक बहस को जन्म दिया। लद्दाख की जनभावना अब विशेष संवैधानिक दर्जे की मांग पर केंद्रित है, जैसे अनुच्छेद 371 के अनुरूप प्रावधान, ताकि स्थानीय जनजातीय और पारंपरिक हितों को सुरक्षा मिल सके। आर्थिक दृष्टि से, लद्दाख की अर्थव्यवस्था मुख्यतः पारंपरिक पशुपालन, ऊन और पश्मीना उद्योग, तथा पर्यटन पर निर्भर रही है। केंद्रशासित प्रदेश बनने के बाद बुनियादी ढांचे में निवेश और पर्यटन में वृद्धि तो हुई, लेकिन पर्यावरणीय दबाव, संसाधनों के असमान वितरण और स्थानीय निर्णय प्रक्रिया से दूरी जैसी चुनौतियाँ सामने आई हैं। राजनीतिक रूप से, 1989 से चली आ रही स्वायत्तता की मांग अब “राज्य का दर्जा” प्राप्त करने की आकांक्षा में परिवर्तित हो चुकी है। यह शोध-पत्र इस ऐतिहासिक यात्रा और वर्तमान तनावों का आलोचनात्मक मूल्यांकन करता है जहाँ एक ओर लद्दाख अपनी विशिष्ट पहचान और पारिस्थितिक संतुलन को संरक्षित रखना चाहता है, वहीं दूसरी ओर वह लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व और आत्मशासन की व्यापक मांग भी कर रहा है।

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Contrôle bibliographique ouvert

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Titre Crossref
परंपरा से परिवर्तन तकः लद्दाख की सामाजिक-सांस्कृतिक, आर्थिक तथा राजनीतिक संरचना का समकालीन अध्धयन
Date Crossref
08/08/2026
Éditeur
Inspira
Type
journal-article

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